IAS / PCS

देश की सबसे प्रतिष्ठित भारतीय सिविल सेवा परीक्षा के पैटर्न में बदलाव किया गया है। सिविल सेवा परीक्षा का नाम बदलकर अब सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (सीसेट) कर दिया गया है। सीसेट-2011 की प्रारंभिक (प्रीलिम्स) परीक्षा में दो प्रश्नपत्र होंगे। पहला प्रश्नपत्र सामान्य अध्ययन का होगा तथा दूसरा प्रश्नपत्र सामान्य अभिरूचि (एप्टीट्यूड) का होगा। 
प्रारंभिक परीक्षा से अब वैकल्पिक विषय हटा दिया गया है। दोनों प्रश्नपत्र 200-200 अंक के होंगे तथा दोनों प्रश्नपत्रों की अवधि समान दो-दो घंटे की होगी। प्रारंभिक परीक्षा के प्रथम प्रश्नपत्र में पर्यावरणीय पारिस्थितिकी का नया खण्ड भी जोड़ा गाया है। इन प्रश्नों का स्तर दसवीं कक्षा का होगा। मुख्य परीक्षा में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। 
आईएएस प्रीलिम्स परीक्षा में परिवर्तन हुआ है। बदले हुए परीक्षा के पैटर्न के आधार पर ही 2011 की परीक्षा आयोजित की जाएगी। मुख्य परीक्षा में परिवर्तन अभी नहीं हुआ है हालांकि चर्चा चल रही है।सिविल सेवा की तैयारी में पत्र-पत्रिकाओं का योगदान अहम होता है। सामान्य अध्ययन पत्र की आधी तैयारी का दारोमदार इन्ही के ऊपर होता है। इसके अलावा बहुत सारे ऐच्छिक विषयों यथा राजनीतिविज्ञान, लोकप्रशासन, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र में भी पत्र-पत्रिकाएँ आपको अद्यतन बने रहने में मदद करती हैं। निबंध पत्र में अच्छे अंक लाना पूरी तरह आपके द्वारा अच्छे पत्र-पत्रिकाओं के अध्ययन पर निर्भर है। साक्षात्कार में भी ये आपको काफी मदद पहुंचाते हैं।

 सिविल सेवा की तैयारी में उपयोगी पत्र-पत्रिकाओं की एक संक्षिप्त सूची

समाचार पत्र:-

The Hindu

दैनिक जागरण/हिंदुस्तान/दैनिक भास्कर/इकोनोमिक्स टाइम्स

पत्रिकाएं:- ( कोई तीन )


प्रतियोगिता दर्पण
चाणक्या सिविल सर्विसेज टूडे
सिविल सर्विसेज क्रोनिकल
सिविल सर्विसेज टुडे
CSR (हिन्दी या अंग्रेजी)
सिविल सर्विसेज टाईम्स
अरिहंत समसामयिकी महासागर
पनोरमा  समसामयिकी



अन्य पत्रिकाएं:-

विज्ञान प्रगति
योजना
कुरुक्षेत्र

अहा, जिंदगी! (निबंध एवं सकारात्मक चिंतन हेतु)

Frontline (ऐच्छिक)/इंडिया टुडे/आउटलुक/शुक्रवार  के विशिष्ट अंक

सन्दर्भ पत्रिकाएं:- मनोरमा ईयर बुक
भारत (ईयर बुक)
यूनिक सामान्य ज्ञान
Question Bank (UPSC: 1988-2008) with answer
प्रारम्भिक:- अरिहंत
मुख्य:- सिविल सर्विसेज क्रोनिकल

देखें और सुनें -----
DD न्यूज़
बी बी सी लन्दन रेडिओ

एक बार सिलेबस को समाप्त करने के बाद
 आप किसी भी नई किताब को देखकर यह पता कर सकते हैं की उसमे आपके कामका और कुछ है या नही। वैसे NCERT की ९,१०,११,१२ क्लास की किताबों को आप आंख मूंदकर सामान्य अधययन का आधार बनाने के लिए प्रयोग कर सकते हैं.


१.इतिहास हेतु

-आधुनिक भारत- यशपाल एवं ग्रोवर

-स्वाधीनता संग्राम-विपिन चंद्र

-आजादी के बाद का भारत- विपिन चंद्र

-प्रतियोगिता दर्पण -कला-संस्कृति अतिरिक्तांक

-प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत- प.द.अतिरिक्तांक (सिर्फ़ प्रारंभिक परीक्षा हेतु)



२.भूगोल हेतु



-Atlas- Oxford Student's Atlas या हिमालय एटलस

-११ एवं १२ की NCERT की बुक या भारत का भूगोल-खुल्लर

-प्रतियोगिता दर्पण भूगोल अतिरिक्तांक प्राम्भिक परीक्षा के लिए



३.प्रशासन एवं संविधान

-भारतीय राज्यव्यवस्था-लक्ष्मीकांत

-हमारा संविधान- सुभाष कश्यप या बासु



४.अर्थशास्त्र एवं भारतीय अर्थव्यवस्था

-प्रतियोगिता दर्पण का भारतीय अर्थव्यवस्था अतिरिक्तांक

-भारतीय अर्थव्यवस्था- रुद्रदत्त व् सुन्दरम



५.विज्ञानं/ विज्ञानं एवं प्रोद्योगिकी

_प्राम्भिक परीक्षा हेतु-

NCERT ९,१० की बुक

-प्रतियोगिता दर्पण का सामान्य विज्ञानं अतिरिक्तांक

_मुख्य परीक्षा हेतु

भारत में विज्ञानं एवं प्रोद्योगिकी- टाटा मैक्ग्राहिल या विवास पैनोरमा या सिविल सर्विसेस क्रोनिकल प्रकाशन की -कोई एक

-विज्ञानं प्रगति पत्रिका के नवीनतम साल-दोसाल के अंक

-कंप्यूटर पर संक्षिप्त टिप्पणी युक्त कोई बुक



६.अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध / भारत के विदेश सम्बन्ध

-२१वी शताब्दी में अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध -पुष्पेश पन्त

-अंतर्राष्ट्रीय संगठन- पुष्पेश पन्त

-सिविल सेवा हेतु समर्पित पत्रिकाओं के अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध / भारत के विदेश सम्बन्ध विशेषांक



७.गणित एवं तर्कशक्ति-

प्रतियोगिया दर्पण अतिरिक्तांक



८.सांख्यिकी -

प्राम्भिक सांख्यिकी एवं भारतीय आर्थिक विकास -टी.आर.जैन एवं वि.के.ओहरी।

या NCERT की सांख्यिकी की ११ की बुक

सिविल सेवा की तैयारी राजनीतिविज्ञान विषय के साथ


सिविल सेवा के लिए राजनीति विज्ञान एक पसंदीदा वैकल्पिक विषय रहा है. हिंदी और अंग्रेजी, दोनों ही माध्यमों के अभ्यर्थियों ने अपनी सफलता के लिए इस विषय पर भरोसा किया है. और परीक्षा के परिणाम भी इस बात की पुष्टि करते हैं की इस विषय ने अपने चाहनेवालों को निराश नही किया है. आलोक कुमार झा, मंजू राजपाल जैसे लोगों ने दिखाया है की इस विषय को लेकर आप सफलता की दौड़ में सबसे आगे आने का ख्वाब देख सकते हैं इस विषय की सबसे बड़ी खासियत ये है की मुख्या परीक्षा के सामान्य अध्ययन पत्र में यह सबसे ज्यादा मदद पहुँचने वाला वैकल्पिक विषय है. पहले पत्र में भारतीय संविधान और राज्यव्यवस्था खंड तथा दुसरे पत्र में अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध एवं भारत के विश्व सम्बन्ध खंड के लगभग २०० अंक के सामान्य अध्ययन के प्रश्न इस वैकल्पिक विषय के छात्रों के लिए खुद-ब-खुद तैयार हो जाते हैं. इसके अलावा भारत का स्वाधीनता संग्राम एवं अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था खंड के भी ५०-६० अंक के प्रश्न को यह विषय अपने में समेटे हुए है. प्राम्भिक परीक्षा में भी सामान्य अध्ययन के १५-२० प्रश्न इस वैकल्पिक विषय से कवर हो जाते हैं 
अब प्रश्न उठता है की कैसे अभ्यर्थियों के लिए यह विषय उपयुक्त है? मेरा मानना है कि वैसे अभ्यर्थी जिन्होंने राजनीति विज्ञान का किसी भी स्तर पर अध्ययन किया है, उनके लिए यह एक स्वाभाविक पसंद है. साथ ही वैसे लोग जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध में काफी रूचि है और जो भारतीय प्रशाशन की बारीकियों के अध्ययन में दिलचस्पी रखते हैं, उनके लिए यह अच्छा विषय है.

राजनीति विज्ञान


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु


राजनीतिक सिद्धांत की रुपरेखा - ओ पी गाबा - मयूर प्रकाशन



तुलनात्मक राजनीति की रुपरेखा - ओ पी गाबा - मयूर प्रकाशन



भारतीय प्रशासन एवं राजनीति (राज्यों की राजनीति सहित) - बी एल फाडिया - प्रतियोगिता साहित्य



संविधान - डी डी बासु/ सुभाष कश्यप



संसद - सुभाष कश्यप



राजनीति विज्ञान - NCERT - XI, XII



मुख्य परीक्षा हेतु-



(प्रारम्भिक के पुस्तकों के अतिरिक्त)



राजनीतिक चिंतन की रुपरेखा - ओ पी गाबा - मयूर प्रकाशन



अंतर्राष्ट्रीय राजनीति (सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्ष)- बी एल फाडिया - प्रतियोगिता साहित्य



अंतर्राष्ट्रीय संगठन - पुष्पेश पन्त - TMH



२१ शताब्दी में अन्तर सम्बन्ध - पुष्पेश पन्त - TMH



The Hindu से अन्तर सम्बन्ध पर नोट्स



Frontline से नोट्स



IGNOU political science book of BA & MA



सिविल सेवा के लिए निकलनेवाली स्तरीय पत्रिकाओं के अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध विशेषांक


किताबों की यह सूची मात्र सांकेतिक है, अभी हिंदी माध्यम में राजनीतिविज्ञान के हर अंग पर दो-चार अच्छी किताबें उपलब् हैं. हाँ, ये किताबें आपके पाठ्यक्रम को पूरा कवर कर लेती हैं. उसके बाद आप अन्य उपलब्ध पुस्तकों को देख कर ये जान सकते हैं की आपको उनकी जरुरत है या नही.

मुख्य परीक्षा के निबंध पत्र के बारे में

मुख्य परीक्षा के निबंध पत्र के बारे में बहुत सारे छात्र शंकित रहते हैं की क्या लिखना है और कैसे लिखना है? बहुत सारे छात्र इस पत्र को गंभीरता से नही लेते पर यह ध्यान रखे की निबंध पत्र के अंक बहुत बार आपकी सफलता को निर्धारित करते हैं। निबंध में २०० में कोई ८० अंक लाता है तो कोई १५०। अब आप सोच सकते हैं की निबंध के अंकों का क्या महत्व है?

निबंध पत्र के साथ एक और दिक्कत जो छात्रों के सामने आती है वो यह है की पुराने प्रश्नपत्र उपलब्ध नही हो पाते। खैर जहाँ तक निबंध के विषयों की बात है तो ६ दिए गए विषयों में आपको किसी एक विषय पर ३ घंटों में एक निबंध लिखना होता है। शब्द- सीमा का कोई उल्लेख नही होता पर सामान्यतः २०००-२५०० शब्दों में निबंध लिखने का प्रयास करे।

निबंध के विषयों में काफी विविधता होती है और हर एक निबंध अलग-अलग क्षेत्र से होता है। सो यहाँ हर किसी के लिए गुंजाईश है। सामान्यतया समसामयिक मुद्दे, अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे, सामाजिक मुद्दे, साहित्यिक- दार्शनिक -चिन्तनपरक विषय से एक- एक निबंध होते हैं। आपको देखना है की आप किस विषय पर सबसे अच्छा और सबसे हटकर अपने आपको अभिव्यक्त कर सकते हैं।

निबंध लिखने की शैली की जहाँ तक बात है तो वो हर किसी के लिए अलग-अलग होती है। आपको अपनी शैली ख़ुद से निखारनी होगी। बेहतर यह है की आप एक नोटबुक बनाकर उसमे निबंध के लिए महत्वपूर्ण १०-१५ सदाबहार मुद्दे और २०-२५ समसामयिक मुद्दों के लिए ढांचा तैयार करले। इसके अर्न्तगत आप सामान्य अध्ययन में दिए गए कुछ सामाजिक मुद्दों, पर्यावरण सम्बंधित मुद्दों को भी निबंध के लिए तैयार कर ले सकते है। आपको चुने हुए विषयों पर जो भी जानकारी पत्र-पत्रिकाओं या किताबों से मिलती है उसे आप अपनी नोटबुक में जगह देते चले। जरुरी आंकड़े, उद्धरण, काव्य पंक्तियाँ, वर्त्तमान व सटीक उद्धरण ये सब जहाँ से भी मिले उसे आप सम्बंधित निबंध के अर्न्तगत नोट करते चले।

निबंध पत्र के लिए कुछ जरुरी पत्र - पत्रिकाओं की सूची मैं दे रहा हूँ-

*कुरुक्षेत्र

*योजना

*विज्ञानं प्रगति

*आहा, जिन्दगी

*कथन (त्रैमासिक)

*इंडिया टुडे, आउटलुक के कुछ महत्वपूर्ण अंक

*सिविल सेवा से सम्बंधित पत्रिकाओं के आलेख

* समाचार पत्रों के सम्पादकीय पृष्ठ के आलेख।

यह सूची आरंभिक मार्गदर्शन के लिए है, जैसे- जैसे आप अपनी तैयारी में गहरे उतरते जायेंगे, आपको ख़ुद-बखुद जरुरी-गैरजरूरी का फर्क समझ अत जाएगा। हंस की तरह नीर-क्षीर विवेक आपको सूचनाओं के ढेर और भाषा की भूलभुलैयाँ में से अपने कम की सामग्री चुनने में मदद करेगा। और हाँ, सीधी- सादी दिल को छू जाने वाली भाषा में लिखे। परीक्षक भी आपसे प्रसन्न हुए बिना नही रह पायेगा. सिविल सेवा को निकालने की लिए जो सबसे जरुरी चीज है, वो है आपकी रणनीति। यह ऐसी परीक्षा है जिसे आप किसी के सहारे नही उत्तीर्ण कर सकते। आपका आत्मविश्वास, आपकी इच्छा-शक्ति, आपकी अन्तः-प्रेरणा ही आपको सफलता तक ले जा सकती है। इस सेवा को निकलने के पीछे अगर आप कोई बड़ी प्रेरणा ले कर चल रहे हैं तो वो जरुर आपको मदद पहुंचायेगी। यह प्रेरणा समाज सेवा की हो सकती हैं, अपने आपको समाज की नजरों में साबित करने की जरुरत की की हो सकती है, या फ़िर अपने प्रेम को पाने की हसरत आपको इस सेवा को निकालने को प्रेरित कर सकती है।

आपकी रणनीति तो आपको ख़ुद बनानी है,


*एक नोट बुक ले कर उसमे आप सिविल सेवा के बारे में आपको जो भी जानकारी पत्र-पत्रिकाओं से या सफल लोगों के साक्षात्कार से मिलती है, उसे नोट करते चले। जानकारी प्रासंगिक होनी चाहिए।



*अपने ऑप्शनल विषय को पुरी सतर्कता के साथ अपनी रूचि, पाठ्य-सामग्री की उपलब्धता, प्रश्नों की प्रकृति, स्कोरिंग जैसे मुद्दों को ध्यान में रख कर चुने। सुझाव सबसे ले पर करे अपने मन की। हमेशा ध्यान रखे की विषय महत्वपूर्ण नही है, महत्वपूर्ण है आपकी उसपर पकड़ और आपकी सफलता।



*प्राम्भिक और मुख्य परीक्षा के हर अंग के लिए अपनी रणनीति तैयार करे, देखे की आपकी मजबूती क्या है, आपकी कमजोरी क्या है। अपनी मजबूतियों पर ध्यान केंद्रित कर अपनी रणनीति बनाये और अपनी कमजोरियों को धीरे- धीरे घटाते हुए उन्ही भी अपनी मजबूतियों में बदलने का प्रयास करे।

*ऑप्शनल विषय में २२५ और सामान्य अध्ययन में कम से कम ७५ अंक लाने हैं। प्राम्भिक परीक्षा के लिए ३०० का लक्ष्य काफी सटीक है। इसी तरह से आप अपने लिए भी लक्ष्य तय कर उसे प्राप्त कर सकते हैं।



*निबंध के लिए भी शुरू से ही तैयारी करते चले। सामान्य अध्ययन के काफी विषय जो social मुद्दों से सम्बन्ध रखते हैं, को आप Nibandh के रूप में तैयार कर सकते हैं।



*तैयारी करते हुए आपका पुरा ध्यान मुख्य परीक्षा पर होना चाहिए। प्राम्भिक परीक्षा के लिए परीक्षा के पहले के ६ महीने काफी हैं। वैसे यहाँ भी अपनी जरुरत के अनुसार जरुरी फेरबदल कर सकते हैं, पर इस बात का जरुर ध्यान रखे की प्राम्भिक pariksha के पहले आप एक बार मुख्य परीक्षा की taiyari कर चुके हो। यह आपको जरुरी atmviswas देगा।

*अपनी जरुरत के anusar महत्वपूर्ण मुद्दों के लिए short-notes तैयार करे. कैरियर

शुभकामनाओं के साथ,

SABHAR-http://iashindi.blogspot.com

स्कोरिंग विषयों का चयन फायदेमंद

सिविल सेवा की तैयारी कब एवं कैसे करनी चाहिए?
सिविल सेवा परीक्षा ग्रेजुएशन स्तर का कम्पिटिटिव एग्जाम है तथा यह इस देश की सर्वोच्च स्तरीय प्रशासनिक सेवा में नियुक्ति की प्रतियोगिता होती है। इसकी तैयारी के लिए लगभग 12-18 महीने की अवधि की आवश्यकता होती है, क्योंकि दो वैकल्पिक विषयों के अतिरिक्त सामान्य अध्ययन एवं निबंध लेखन जैसे पत्र होते हैं। एक वैकल्पिक विषय एवं सामान्य अध्ययन की तैयारी पहले करें, जिसके लिए एनसीईआरटी की नवीं से बारहवीं तक की पुस्तकें आधार निर्माण के लिए पढ़ें।
वैकल्पिक विषय का चयन कैसे करें?
कुछ विषय अधिक स्कोरिंग होने के कारण एवं सामान्य अध्ययन एवं निबंध में अधिकतम प्रतिनिधित्व के कारण चयनित किए जा सकते हैं, जैसे भूगोल, राजनीति विज्ञान, लोक प्रशासन, इतिहास एवं समाजशास्त्र, जो सरल भी हैं एवं सामान्य अध्ययन में मददगार सिद्ध होते हैं। विशेषकर भूगोल के प्रश्न प्राथमिक परीक्षा में 30-35 होते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में भूगोल, इतिहास एवं राजनीति शास्त्र में से प्रत्येक से 120 अंक के प्रश्न पूछे जाते रहे हैं। निबंध लेखन में समाजशास्त्र, भूगोल, इतिहास एवं अर्थव्यवस्था से संबन्धित अधिकतर प्रश्न पूछे जाते रहे हैं।
माध्यम का चुनाव कैसे किया जाए?
भाषा के आधार पर सिविल सेवा परीक्षा का भेदभाव नहीं किया जाता। अत: अंग्रेजी एवं हिन्दी माध्यम, दोनों से ही समान रूप से सफलता प्राप्त होती हैं, परन्तु हिन्दी माध्यम से तुलना में कम सफलता का कारण है पाठय़ सामग्री का अभाव, उसकी प्रामाणिकता एवं सतही होना। सिविल सेवा के प्रश्न एवं मॉडल उत्तर अंग्रेजी की मानक पुस्तकों पर ही आधारित होते हैं, अत: हिन्दी माध्यम के छात्रों को इन पुस्तकों का भी अध्ययन करना चाहिए।
साइंस बैकग्राउंड के छात्रों के लिए क्या संभावना है?
साइंस विषयों का सिविल सेवा परीक्षा में प्रचलन निरंतर कम होता जा रहा है, इसका कारण है बड़ा पाठय़क्रम एवं विषयों की जटिलता। विज्ञान के छात्रों को ऐसे विषयों का चयन करना चाहिए, जिनमें विज्ञान के मूल सिद्धांत का प्रयोग हो, परन्तु विषयवस्तु व्यावहारिक एवं आमजीवन से संबन्धित हो, जैसे भूगोल, जो विज्ञान एवं कला को जोड़ता है।
तैयारी में शिक्षकों का मार्गदर्शन कितना जरूरी है?
सामान्यत: सिविल सेवा के पाठय़क्रम हर बार नए ट्रैंड के अनुसार होते हैं। ज्वलंत मुद्दों से सम्बन्धित होते हैं, जो विश्वविद्यालयी एजुकेशन में प्राप्त नहीं होते। नए विषयों को चार से छह महीने की अवधि में तैयार करना होता है। स्वाध्याय अनिवार्य है, परन्तु मार्गदर्शन के अभाव में विषयांतर होने की अधिक संभावना होती है। निश्चित सफलता के लिए मेहनत, लगन, पाठय़ सामग्री के अतिरिक्त उचित दिशा निर्देश आवश्यक हैं। अत: मार्गदर्शन जरूरी है।
साक्षात्कार की तैयारी क्या अलग से की जाती है?
साक्षात्कार के संदर्भ में यह एक भ्रम है कि यह उम्मीदवार के ज्ञान का परीक्षण होता है। वास्तविक रूप में यह व्यक्तित्व का आकलन है, जिसमें आपकी जॉब सूटेबिलिटी एवं एप्टिटय़ूड तथा मॉरल एवं एथिकल एप्टिटय़ूड को परखा जाता है। कहीं न कहीं उम्मीदवार के मनोविज्ञान का परीक्षण एवं वर्तमान की घटनाओं के प्रति संवेदनशीलता तथा विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता का टैस्ट होता है। क्षेत्रवाद जैसी संकीर्ण सोच के स्थान पर राष्ट्रवादी विचारों को इन्टरव्यू में रखना चाहिए
सिविल सर्विस का ग्लैमर आज भी युवाओं में सबसे ज्यादा है। इसके आकर्षण का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि कुछ सौ सीटों के लिए लाखों युवा इस परीक्षा में प्रति वर्ष भाग लेते हैं। सफलता के प्रति गंभीर अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम का इंतजार किए बिना ही मुख्य परीक्षा की तैयारी में लग जाते हैं। यूं कहें कि मुख्य परीक्षा की तैयारी प्रारंभिक परीक्षा के साथ ही आरंभ हो जाती है। यदि छात्रों तैयारी की रणनीति सही नहीं है, तो अकसर परीक्षा की तिथि निकट आने के साथ ही युवाओं में संशय व ऊहापोह बढ़ता जाता है। जिससे उनका आत्मविश्वास कमजोर होता है। सफल अभ्यर्थियों का कहना है कि सफलता पाने के लिए आत्मविश्वास से लबरेज होना अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा युवाओं के लिए अपनी अध्ययन नीति में संतुलित और वस्तुनिष्ठ होना जरूरी है। रीक्षा का स्वरूप

मुख्य परीक्षा की प्रकृति प्रारंभिक परीक्षा से अलग होती है। इसमें बहुविकल्पीय प्रश्नों की बजाय आपको विस्तृत उत्तर लिखने होते हैं। इसके लिए न सिर्फ पूरे विषय का गहन अध्ययन जरूरी है, बल्कि आपमें विश्लेषणात्मक और तुलनात्मक क्षमता का होना भी जरूरी है। इससे आपकी लेखन शैली का पता चलता है। मुख्य परीक्षा के तहत नौ प्रश्न पत्र होते हैं। इसमें प्रथम प्रश्नपत्र किसी एक भारतीय भाषा (300 अंकों) का होता है, जो संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्णित हैं। द्वितीय प्रश्न पत्र अंग्रेजी भाषा का होता है। यह 300 अंकों का होता है। इन तीनों प्रश्नपत्रों में आपको केवल क्वालिफाइंग अंक पाने होते हैं। इसके अंक मेरिटलिस्ट में नहीं जोड़े जाते। तीसरा प्रश्नपत्र निबंध का आता है, जो कुल 200 अंकों का होता है। सामान्य अध्ययन और दो वैकल्पिक विषयों के दो-दो प्रश्नपत्र होते हैं। इन छह प्रश्नपत्रों के लिए 300-300 अंक निर्धारित हैं, जिनमें प्राप्त अंक मेरिटलिस्ट में जुड़ते हैं। प्रत्येक प्रश्नपत्र के लिए तीन घंटे का समय निर्धारित होता है।


अध्ययन नीति

मुख्य परीक्षा में मिलने वाले अंक से ही आपकी रैंकिंग निर्धारित होती है। अत: स्वाभाविक तौर पर इसके लिए आपको एक विशेष रणनीति तैयार करनी होगी। सभी उम्मीदवारों के लिए एकसमान रणनीति सफल नहीं हो सकती, क्योंकि प्रतिभागी कई वर्गों में विभक्त होते हैं और सबकी योग्यता अलग-अलग होती है। ऐसे में अपनी क्षमताओं व सहजता के अनुरूप ही भिन्न-भिन्न रणनीति बनाने की आवश्यकता होती है। पहले से तैयारी करने की वजह से कुछ विषय या टॉपिक पर आपकी पकड़ बहुत अच्छी हो जाती है और कुछ कमजोर पड़ जाते हैं। इन विषयों या अध्यायों के वर्गीकरण के हिसाब से भी एक विशेष रणनीति बनाने की जरूरत होती है। यह आपको तय करनी होगा कि कमजोर विषय या अध्याय पर कितना समय दें। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उन विषयों की उपेक्षा कर देें, जिसमें आप बेहतर स्थिति में हैं। एकसाथ संपूर्ण पाठ्यक्रम को एकसमान नहीं पढ़ा जा सकता। चूंकि अब समय कम बचा है, तो अपने अध्ययन को सेलेक्टिव बनाना जरूरी है। सेलेक्टेड अध्याय के अच्छे से नोट्स बना लें, इससे आपको पुनरावृत्ति करने में आसानी होगी। विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों के ट्रेंड के अनुसार संभावित अध्याय से महत्वपूर्ण प्रश्नों को छांट लेना चाहिए। अधिक विस्तार में जाना न केवल अनुपयोगी, बल्कि घातक भी होता है।


समय प्रबंधन

किसी भी परीक्षा की तैयारी में समय प्रबंधन का बहुत बड़ा स्थान होता है। इतने कम समय में कुल नौ पेपरों की तैयारी आसान नहीं है। लेकिन इसे आसान बनाया जा सकता है समय प्रबंधन से। समय प्रबंधन अभ्यर्थी अपने क्षमता के अनुरूप ही कर सकते हैं। मुख्य परीक्षा के लिए प्रतिदिन कम से कम दस घंटे का समय पढ़ाई को अवश्य दें। विषय के विस्तृत होने के कारण प्रतिदिन चार घंटे का समय सामान्य अध्ययन के लिए निर्धारित करें।


लिखने का अभ्यास

कई बार ऐसा होता है कि प्रश्न का उत्तर जानने के बावजूद आप लिख नहीं पाते हैं। इसकी दो वजह है, लिखने में पिछड़ जाना या प्रश्न के उत्तर देने में समय प्रबंधन का अभाव। लिखने में पिछडऩे का मतलब है कि समय के अनुसार अपनी लेखन गति को नहीं बढ़ा पाना। इसको दूर करने के लिए स्वयं का बना हुआ या किसी पुस्तक या पत्रिका में दिए गए मॉडलप्रश्न को परीक्षा में निर्धारित समय में सतत् हल करने का अभ्यास करना चाहिए। परीक्षा कक्ष में समय प्रबंधन के अभाव या शब्द सीमा का पालन नहीं करने से भी प्रश्न छूट जाते हैं। उलझन व भटकाव से बचते हुए प्रश्नों के सटीक उत्तर देें।


हिंदी

-उत्तर को इंप्रेसिव बनाने के लिए संभावित प्रश्नों से जुड़े पहलुओं के लिए साहित्यकारों के कथन व उद्धरणों का प्रयोग करें।

-लेखकों/रचनाकारों की मूल रचनाओं का विशद् अध्ययन करें।

-शार्ट नोट्स व व्याख्या पर फोकस करें।

-समय प्रबंधन व तनाव मुक्त रहने की कोशिश करें।

-चूंकि भाषायी पेपर है, इसलिए व्याकरण संबंधी अशुद्धियां न हो, इस बात पर विशेष ध्यान दें।

-परीक्षा कक्ष में ऐसे प्रश्न जिसमें आप सहज नहीं हैं, वैसे में मानसिक संतुलन को बनाए रखते हुए अपनी जानकारी का इस्तेमाल करें।

-एक्युरेसी पर जोर दें। अधिक अलंकारिक भाषा दिखाने के फेर में समय व्यर्थ न करें।

-उत्तर देते समय भाषा के प्रवाह में निरंतरता बनाए रखने के लिए पढऩे व लिखने का ज्यादा से ज्यादा अभ्यास करें।

-अभ्यास हेतु हल किए गए प्रश्नों की सत्यता व सटीकता जांचने के लिए अच्छे गाइड (व्यक्ति) का सहयोग लेना चाहिए।


पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन

-पाठ्यक्रम परिवर्तन के बाद जुड़े अध्यायों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

-सबसे अहम विषय इंडियन एडमिनिस्ट्रेशन है। इसके लिए हाल के समय में हुए कुछ बदलाव या नयेपन पर पैनी नजर बनाए रखें।

-लेख की निष्पक्षता हेतु पॉजिटिव व निगेटिव पहलूओं में संतुलन बनाए रखने के लिए दोनों ही पक्षों को सही तरीके से आत्मसात करें।

-समसामयिक घटनाओं पर नजर रखते हुए, उससे जुड़े एडमिनिस्टे्रटिव पहलूओं पर विशेष ध्यान दें।

-प्रशासनिक कार्यों से जुड़े संवैधानिक पहलूओं को नजर अंदाज न करें।

-लेखन में प्रभावी बनाने के लिए विद्वानों की पुस्तकों के नाम, उनके सिद्धांत व सिफारिशों का अवश्य उल्लेख करें। इसके लिए कुछ सिद्धांतों व विद्वानों का एक संकलन तैयार कर सकते हैं।

-परीक्षा कक्ष में उत्तर देते समय मूल्यांकन स्वयं का होना चाहिए, लेखकों या विद्वानों का नहीं।


सामान्य अध्ययन

-विगत वर्षों के प्रश्नों का विश्लेषण कर मुख्य खंड की पहचान करें और साथ ही प्रश्नों के स्वरूप को पहचानें।

-सभी प्रश्नों का उत्तर प्रारूप तैयार कर लें तथा उसी के अनुरूप अभ्यास करें।

-प्रामाणिक तथ्यों का सही संकलन करें गलत तथ्यों का नकारात्मक प्रभाव होगा।

-दो अंकों के प्रश्नों और शार्ट नोट्स के लिए विशेष तैयारी करें। इसमें लगभग सौ प्रतिशत अंक मिलते हैं।

-चूंकि सामान्य अध्ययन का क्षेत्र विस्तृत है और वैकल्पिक विषयों के पेपरों की संख्या अधिक है, इसलिए समय प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।

-मॉडल प्रश्नों का हल करते समय उत्तर का आरंभ प्रश्नों के अनुसार सटीक देने का अभ्यास करना चाहिए।

-लेखन शैली इस तरह से विकसित करें कि आपके उत्तर में सिविल की मानसिकता व व्यापक सोच की झलक मिले।

-भाषा के प्रवाह के साथ प्रश्नों में निहित एक से अधिक आयामों को जोडऩे का प्रयास करें। जिसके लिए समाचार पत्रों व पत्रिकाओं को नियमित रूप से पढें़ व महत्वपूर्ण तथ्यों के नोट्स बनाएं।


दर्शनशास्त्र

-विगत वर्षों के प्रश्नों का सही विश्लेषण करके महत्वपूर्ण खंड या प्रश्न को चिह्नित कर लें, पूरे पाठ्यक्रम की तैयारी करना आसान हो जाएगा।

-लेखन में मौलिकता लाने के लिए विषय की मूल भावना से परिचित होने पर विशेष ध्यान दें। इससे विश्लेषण क्षमता भी बढ़ेगी।

-चूंकि प्रश्न वर्णनात्मक प्रकार के होते हैं, लिखने का नियमित अभ्यास ज्यादा जरूरी है।

-दर्शनशास्त्र जैसे विषय के लिए मूल संकल्पनाओं पर अधिक बल दें।

-उत्तर को पूर्ण तथ्यात्मक रखें। भटकाव की आशंकाओं से बचने के लिए उत्तर को मूल संकल्पनाओं एवं विचारों के करीब रखेंं। प्रश्नों के उत्तर देने में -किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से बचें। ऐसा करना क्योंकि यह घातक सिद्ध हो सकता है।


इतिहास

-पाठ्यक्रम में मामूली परिवर्तन हुआ है, इस परिवर्तन पर विशेष ध्यान रखें। ठ्ठहालांकि द्वितीय प्रश्न पत्र में मानचित्र से संबंधित प्रश्नों का उल्लेख नहीं किया गया, फिर भी इस आधार पर अभ्यर्थी तैयारी के दौरान रणनीति में विशेष परिवर्तन नहीं करें।

-तैयारी करते हुए महत्वपूर्ण विषयों व परीक्षा के लिहाज से उनकी महत्ता का भी ध्यान रखें।

-प्रश्नों का उत्तर देते समय समय सीमा का ध्यान रखेंं। किसी एक ही उत्तर पर अधिक समय दूसरे उत्तर के लिए आपके समय को कम कर देगा।

-मुख्य परीक्षा में सतही ज्ञान के लिए अंक नहीं दिये जाते हैं। इसलिए सभी पहलूओं के समीक्षात्मक अध्ययन पर जोर देंं।

-तथ्यों का संकलन देना पर्याप्त नहीं है, विश्लेषणपरक दृष्टिकोण विकसित करें।


भूगोल

-संभावित व महत्वपूर्ण अध्याय के शॉर्ट नोट्स बना ले।

-शॉर्ट नोट्स लिखने का अधिक से अधिक अभ्यास करें।

-अपने कॉन्सेप्ट को अधिक से अधिक सरल भाषा में व्यक्त करने पर जोर दें।

-भूगोल का संबंध सामान्य अध्ययन से भी है, इसलिए सामान्य अध्ययन व वैकल्पिक (भूगोल) की तैयारी साथ-साथ करने में समझदारी है।

-इस विषय में मानचित्र से जुड़ प्रश्न भी पूछे जाते हैं, इसलिए इसके लिए विशेष रूप से तैयारी करनी चाहिए। सही उत्तर मिलने पर इसमें सौ फीसदी अंक मिलते हैं।

-विषय से संबंधित विशेषज्ञों से बातचीत करें। उत्तर देने में स्पष्टता आएगी। अधिक से अधिक पूर्व परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्नों का अभ्यास करें।


नोट्स बनाने की तकनीक

सिविल परीक्षा की तैयारी में नोट्स का काफी महत्व है। अच्छे नोट्स आपकी तैयारी के लिए संतुलित और प्रभावी रणनीति बनाने में कारगर होते हैं। साथ ही पूरे पाठ्यक्रम को कम समय में दोहराने में भी मदद मिलती है। अब प्रश्न यह है कि सही नोट्स बनाने का तरीका क्या है। आइए जानें:

लीनियर नोट्स : यह विधि उन छात्रों के लिए बेहतर है, जिनके लिए कम समय होने के कारण विस्तृत नोट्स बनाना संभव नहीं होता। इसमें पाठ्यपुस्तक में ही महत्वपूर्ण लाइनों अथवा तथ्यों (तारीख, आंकड़े आदि) को अलग-अलग रंगों के पेन या पेंसिल से अंडरलाइन कर लिया जाता है। पर, यह उसी स्थिति में ठीक है जबकि पूरा मैटर बेहतर तरीके से व्यवस्थित हो। इस प्रक्रिया का नुकसान यह है कि पूरी सामग्री बिखरे रूप में होने पर आपको संग्रहित कर पाना कठिन होता है और अनावश्यक समय मैटर खोजने में बर्बाद होता है। बेहतर है कि एक सादे रजिस्टर या खुले पन्ने पर नोट्स बनाएं। पेज के आधे भाग को खाली रखें ताकि बाद में मिलने वाले तथ्यों, जानकारियों को लिख सकें।

पैटर्न नोट्स: इस विधि को स्केल्टन विधि भी कहते हैं। इसमें किसी विषय को अलग-अलग अध्यायों और टॉपिक्स में बांटते हैं। फिर प्रत्येक टॉपिक के मुख्य बिंदुओं और तथ्यों को हेडिंगवार और चित्रात्मक आदि विधियों से छोटे-छोटे बिंदुओं में समाहित करते हैं। यह न सिर्फ दोहराने में आसान होते हैं, बल्कि इसमें आपका समय भी कम लगता है। आप तुलनात्मक रूप से प्रत्येक विषय और टॉपिक को जोड़ पाने व समझ पाने में सक्षम हो जाते हैं। ऐसे नोट्स अंतिम समय में रामबाण की तरह उपयोगी होते हैं। पूरे विषय को समझकर स्पष्ट रणनीति बनाना आसान हो जाता है।
  • sabhar- live hindustan

1 comment:

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